वरयेत् कुलजां प्राज्ञो विरूपामपि कन्यकाम् |
रूपशीलां न नीचस्य विवाहः सदृशे कुले ||
बुद्धिमान व्यक्ति को अच्छे कुल में जन्मी कुरूप कन्या से भी विवाह कर लेना चाहिए, परन्तु अच्छे रूप वाली नीच कुल की कन्या से विवाह नहीं करना चाहिए क्योंकि विवाह – सम्बन्ध सामान कुल में ही श्रेष्ठ होता है|

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