नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः |
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः ||

इस आत्मा को शास्त्र नहीं काट सकते, आग नहीं जला सकती, जल नहीं गला सकता और वायु नहीं सुखा सकती|

श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय २ श्लोक २३