जानीयात् प्रेषणे भृत्यान् बान्धवान् व्यसनाऽऽगमे |
मित्रं चाऽऽपत्तिकालेषु भार्यां च विभवक्षये ||
नौकरों की बाहर भेजनें पर, संकट के समय भाई-बंधुओं की, विपत्ति के समय मित्रों की और धन के नष्ट हो जाने पर स्त्री की परीक्षा करनी चाहिए|
साधना, सिद्धि व जीवन पर मेरे विचार
जानीयात् प्रेषणे भृत्यान् बान्धवान् व्यसनाऽऽगमे |
मित्रं चाऽऽपत्तिकालेषु भार्यां च विभवक्षये ||
नौकरों की बाहर भेजनें पर, संकट के समय भाई-बंधुओं की, विपत्ति के समय मित्रों की और धन के नष्ट हो जाने पर स्त्री की परीक्षा करनी चाहिए|
2 comments
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August 9, 2008 at 1:47 am
Ayush
Great. Two thousand year old wisdom and very much applicable even today.
Thanks. Keep it up.
August 9, 2008 at 1:54 am
Nikhilashish
धन्यवाद आयुषजी|