शरदि न वर्षति गर्जति वर्षति वर्षासु निस्वनो मेघः |
नीचो वदति न कुरुते न वदति सुजनः करोत्येव ||

शरदकाल का मेघ गरजता है, पर बरसता नहीं| वर्षाऋतु का मेघ गरजे बगैर बरसता है| इसी प्रकार नीच व्यक्ति आश्वासन देकर चुप रह जाता है और सज्जन व्यक्ति कहे बिना उत्तम कार्य करके दिखाता है|

सौजन्य – चन्दामामा दिसम्बर १९८२