विश्वव्यापकवारिमध्यविलसच्छ्वेताम्बुजन्मस्थितां
कर्त्रीँखड्गकपालनीलनलिनै राजत्करां नीलभां |
कांचीकुण्डलहारकंकणलसत्केयुरमंजीर
तामाप्तैर्नागवरैर्विभुषततनूमारक्तनेत्रत्रयां ||
पिंगोग्रैकजटां लसत्सुरसनां दंष्ट्राकरालाननां
चर्मद्वैपिवरंकटौ विदधतीँ श्वेतास्थिपट्टालिकां |
अक्षोभ्येण विराजमानशिरसं स्मेराननां भोरुहां तारां
शावहृदासनां दृढकुचामंबांत्रिलौक्याःस्मरेत ||
विश्वव्यापक जल के मध्य में श्वेत कमल पर अवस्थित हैं| दाहिने हाथों में खड्ग एवं नील कमल तथा बांये हाथों में कर्तरिका एवं कपाल धारण किए हुए हैं| नीलवर्ण जैसी आभामय कान्तिवाली तथा कांची, कुण्डल, हार एवं केयूर आदि आभूषणों से सुशोभित हैं| सुंदर नागों से विभूषित एवं लाल – लाल तीन नेत्रों से शोभायमान हैं| सर पर पिंगल वर्ण की एक जटा है| चंचल जिव्हा है| उनकी दंतपंक्ति मुख विकराल हैं| कमर में व्याघ्रचर्म धारण किए हुए हैं| माथे पर श्वेतास्थिपट्टिका धारण किए हैं| शिर पर नागरुपधारी अक्षोभ्य ऋषि विराजमान हैं| अपने भावावेश में हास्य वदन वाली हैं| शव के ह्रदय पर बैठी हूई, कठोर स्तन वाली एवं तीनों लोकों की स्वामिनी भगवती तारा का स्मरण करना चाहिए|

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