उदारस्य तृणं वित्तं, शूरस्य मरणं तृणं |
विरक्तस्य तृणं भार्या, निस्पृहस्य तृणं जगत् ||
दाता के लिए धन, शूर के लिए मृत्यु, विरागी के लिए पत्नी तथा कामना न रखने वाले के लिए यह जगत एक तिनके के समान मूल्यहीन है|
सौजन्य – चन्दामामा फरवरी १९८२
साधना, सिद्धि व जीवन पर मेरे विचार
उदारस्य तृणं वित्तं, शूरस्य मरणं तृणं |
विरक्तस्य तृणं भार्या, निस्पृहस्य तृणं जगत् ||
दाता के लिए धन, शूर के लिए मृत्यु, विरागी के लिए पत्नी तथा कामना न रखने वाले के लिए यह जगत एक तिनके के समान मूल्यहीन है|
सौजन्य – चन्दामामा फरवरी १९८२
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