वसन्ते ज्ञायते भेदः काकस्य च पिकस्य च |
सताश्चा व्यसतो भेदः समाये एव ज्ञायते ||

कौआ और कोयल देखने में एक जैसे लगते हैं, लेकिन वसंत ऋतु में उनका भेद मालूम हो जाता है| इसी प्रकार उत्तम और नीच व्यक्ति भी बाहर से देखने में एक समान लगते हैं, पर ज़रूरत के समय उनका अन्तर स्पष्ट हो जाता है|

सौजन्य – चन्दामामा फरवरी १९८४